Saturday, October 12, 2019

What are mountains || पर्वत क्या हैं?


Mountains (पर्वत) :-

पर्वत पृथ्वी की सतह की प्राकृतिक ऊँचाई है। पर्वत का शिखर छोटा तथा आधार चौडा होता है। यह आस-पास के क्षेत्र से बहुत ऊँचा होता है। कुछ पहाड़ बादलों से भी ऊँचे होते हैं। जैसे-जैसे आप ऊँचाई पर जाएँगे जलवायु ठंडी होती जाती है।



कुछ पर्वतों पर हमेशा जमी रहने वाली बर्फ की नदियाँ होती हैं। उन्हें हिमानी कहा जाता है। यहाँ कुछ ऐसे भी पर्वत हैं, जो समुद्र के भीतर हैं तथा जिन्हें आप नहीं देख सकते। कठोर जलवायु होने के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में बहुत कम लोग निवास करते हैं। वहाँ का धरातल खडी ढाल वाला होता है तथा कृषि योग्य भूमि की कमी होती है। पर्वत एक रेखा के क्रम में भी व्यवस्थित हो सकते हैं जिसे श्रृंखला

कहा जाता है। बहुत से पर्वतीय तंत्र समानांतर शृंखलाओं के क्रम में होते हैं जो सैकड़ों किमी. में फैले होते हैं। हिमालय, आल्प्स तथा एंडीज़ क्रमशः एशिया, यूरोप तथा दक्षिण अमेरिका की पर्वत शृंखलाएँ हैं पर्वतों की ऊँचाई एवं आकार में भिन्नता होती है।



पर्वत तीन प्रकार के होते हैं - वलित पर्वत, भ्रंशोत्थ पर्वत तथा ज्वालामुखी पर्वत। हिमालय तथा आल्प्स वलित पर्वत हैं जिनकी सतह ऊबड़-खाबड़ तथा शिखर शंक्वाकार है। भारत की अरावली शृंखला विश्व की सबसे पुरानी वलित पर्वत श्रृंखला है। अपरदन की प्रक्रिया के कारण यह श्रृंखला घिस गई है। उत्तरी अमेरिका के अप्लेशियन तथा रूस के यूराल पर्वत गोलाकार दिखाई देते हैं एवं इनकी ऊँचाई कम है। ये बहुत पुराने वलित पर्वत हैं।

जब बहुत बड़ा भाग टूट जाता है तथा ऊर्ध्वाधर रूप से विस्थापित हो जाता है तब भ्रंशोत्थ पर्वतों का निर्माण होता है। ऊपर उठे हुए खंड को उत्खंड (हार्ट) तथा नीचे फंसे हुए खंडों को द्रोणिका भ्रंश (ग्राबेन) कहा जाता है। यूरोप की राईन घाटी तथा वॉसजेस पर्वत इस तरह के पर्वत तंत्र के उदाहरण हैं। एटलस में दिए गए विश्व मानचित्र से उनकी स्थिति को देखिए तथा इस प्रकार की भू-आकृतियों के कुछ और उदाहरणों का पता लगाइए।

ज्वालामुखी पर्वत ज्वालामुखी क्रियाओं के कारण बनते हैं। अफ्रीका का माउंट किलिमंजारो तथा जापान का फ्यूजियामा इस तरह के पर्वतों के उदाहरण हैं।

पर्वत बहुत लाभदायक होते हैं। पर्वत जल के संग्रहागार होते हैं। बहुत-सी नदियों का स्रोत पर्वतों में स्थित हिमानियों में होता है। जलाशयों के जल को लोगों तक पहुँचाया जाता है। पर्वतों के जल का उपयोग सिंचाई तथा पनबिजली के उत्पादन में भी किया जाता है। नदी घाटियाँ तथा वेदिकाएँ कृषि के लिए उपयुक्त होती हैं। पर्वतों में अलग-अलग प्रकार की वनस्पतियाँ तथा जीव-जंतु पाए जाते हैं। वनों से हमें ईंधन, चारा, आश्रय तथा दूसरे उत्पाद जैसे गोंद, रेजिन इत्यादि प्राप्त होते हैं। सैलानियों के लिए पर्वतीय भाग उपयुक्त स्थान हैं। वे पर्वतों की यात्रा उनकी प्राकृतिक सुंदरता को देखने के लिए करते हैं।





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