Friday, October 11, 2019

Longitude and Latitude || देशान्तर और अक्षांश


देशांतर क्या हैं?


किसी स्थान की स्थिति को बताने के लिए उस स्थान के अक्षांश के अतिरिक्त कुछ और जानकारियों की आवश्यकता भी होती है। आप देख सकते हैं कि प्रशांत महासागर में स्थित टोंगा द्वीप एंव हिंद महासागर में स्थित मॉरीशस द्वीप एक ही अक्षांश (20°00' द.) पर स्थित हैं।

उनकी सही स्थिति जानने के लिए यह पता करना होगा कि उत्तर ध्रुव को दक्षिण ध्रुव से जोड़ने वाली संदर्भ रेखा से पूर्व या पश्चिम की ओर इन स्थानों की दूरी कितनी है? इन संदर्भ रेखाओं को देशांतरीय याम्योत्तर कहते हैं तथा उनके बीच की दूरी को देशांतर के अंशों में मापा जाता है। प्रत्येक अंश को मिनट में तथा मिनट को सेकेंड में विभाजित किया जाता है।



ये अर्धवृत्त हैं तथा उनके बीच की दूरी ध्रुवों की तरफ बढ़ने पर घटती जाती है एवं ध्रुवों पर शून्य हो जाती है, जहाँ सभी देशांतरीय याम्योत्तर आपस में मिलती हैं।
अक्षांश (समानांतर) रेखाओं से भिन्न सभी देशांतरीय याम्योत्तरों की लंबाई समान होती है। इसलिए इन्हें सिर्फ मुख्य संख्याओं में व्यक्त करना कठिन था। तब सभी देशों ने निश्चय किया कि ग्रीनिच, जहाँ ब्रिटिश राजकीय वेधशाला स्थित है, से गुजरने वाली याम्योत्तर से पूर्व और पश्चिम की ओर गिनती शुरू की जाए। इस याम्योत्तर को प्रमुख याम्योत्तर कहते हैं। इसका मान 0° देशांतर है तथा यहाँ से हम 180° पूर्व या 180° पश्चिम तक गणना करते हैं।

प्रमुख याम्योत्तर तथा 180° याम्योत्तर मिलकर पृथ्वी को दो समान भागों, पूर्वी गोलार्ध एवं पश्चिमी गोलार्ध में विभक्त करती है। इसलिए किसी स्थान के देशांतर के आगे पूर्व के लिए अक्षर पू. तथा पश्चिम के लिए अक्षर प. का उपयोग करते हैं। यह जानना रोचक होगा कि 180° पूर्व और 180° पश्चिम याम्योत्तर एक ही रेखा पर स्थित हैं। अब ग्लोब पर अक्षांश (समानांतर) रेखाओं एवं देशांतरीय याम्योत्तरों के द्वारा बनी ग्रिड को देखो। अगर आपको किसी स्थान के अक्षांश एवं देशांतर की सही जानकारी हो तो ग्लोब पर आप उस स्थान का पता आसानी से लगा सकते हैं। उदाहरण के लिए, असम में धुबरी 26° उ. अक्षांश एवं 90° पू. देशांतर पर स्थित है। अब उस बिंदु को देखें जहाँ ये दोनों रेखाएँ एक दूसरे को काटती हैं। यह बिंदु धुबरी की सही स्थिति होगा।

 इसको समझने के लिए कागज़ पर समान दूरी वाली क्षैतिज तथा ऊर्ध्वाधर रेखाएँ खींचिए, रेखाओं को संख्या 1, 2, 3, 4 से तथा क्षैतिज रेखाओं को क, ख, ग, घ, ङ अक्षरों से व्यक्त करें। जिन बिंदुओं पर ये ऊर्ध्वाधर एवं क्षैतिज रेखाएँ एक दूसरे को काटती हैं, वहाँ कुछ छोटे वृत्त खींचिए। इन छोटे वृत्तों को अ, ब, स, द तथा ध नामों से व्यक्त कीजिए। मान लीजिए कि ऊर्ध्वाधर रेखाएँ पूर्व देशांतरों एवं क्षैतिज रेखाएँ उत्तरी अक्षांशों को व्यक्त करती हैं।

अब आप देखेंगे कि वृत्त अ ख उत्तरी अक्षांश तथा 1 पूर्वी देशांतर पर स्थित है। अन्य वृत्तों की स्थिति ज्ञात करें।

देशांतर और समय -

समय को मापने का सबसे अच्छा साधन पृथ्वी, चंद्रमा एवं ग्रहों की गति है। सूर्योदय एवं सूर्यास्त प्रतिदिन होता है। अतः स्वाभाविक ही है कि यह पूरे विश्व में समय निर्धारण का सबसे अच्छा साधन है। स्थानीय समय का अनुमान सूर्य के द्वारा बनने वाली परछाई से लगाया जा सकता है, जो दोपहर में सबसे छोटी एवं सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सबसे लंबी होती है।

ग्रीनिच पर स्थित प्रमुख याम्योत्तर पर सूर्य जिस समय आकाश के सबसे ऊँचे बिंदु पर होगा, उस समय याम्योत्तर पर स्थित सभी स्थानों पर दोपहर होगी।

चूँकि, पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर चक्कर लगाती है, अत: वे स्थान जो ग्रीनिच के पूर्व में हैं, उनका समय ग्रीनिच समय से आगे होगा तथा जो पश्चिम में हैं, उनका समय पीछे होगा। समय के अंतर की दर की गणना निम्नलिखित विधि से की जा सकती है। पृथ्वी लगभग 24 घंटे में अपने अक्ष पर 360° घूम जाती है, अर्थात् वह 1 घंटे में 15° एवं 4 मिनट में 1° घूमती है। इस प्रकार जब ग्रीनिच में दोपहर के 12 बजते हैं, तब ग्रीनिच से 15° पूर्व में समय होगा 15 4 = 60 मिनट अर्थात्, ग्रीनिच के समय से 1 घंटा आगे, अर्थात् वहाँ दोपहर का 1 बजा होगा। लेकिन ग्रीनिच से 15 पश्चिम का समय ग्रीनिच समय से 1 घंटा पीछे होगा यानी, वहाँ सुबह के 11 बजे होंगे। इसी प्रकार जब ग्रीनिच पर दोपहर के 12 बजे होंगे उस समय 180° पर मध्य रात्रि होगी।

 किसी भी स्थान पर जब सूर्य आकाश में अपने उच्चतम बिंदु पर होता है, दोपहर में उस समय घड़ी में दिन के 12 बजते हैं। इस प्रकार, घड़ी के द्वारा दिखाया गया समय उस स्थान का स्थानीय समय होगा। आप देख सकते हैं कि दिए गए देशांतरीय याम्योत्तर पर सभी स्थानों का स्थानीय समय समान है।





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